HERBAL GARDEN
पोथकी (Pothaki)
Classification
Synoyms
Upodika, Potaki, Basella, Upodika lata
Habit
मुलायम, रसयुक्त, आरोही (क्लाइम्बिंग) शाकीय लता
Habitat
यह पौधा भारत के सभी उष्ण और उपोष्ण क्षेत्रों में पाया जाता है। विशेष रूप से घरों के बगीचों, खेतों और आर्द्र भूमि में स्वतः उगता है।
Morphology
- तना: लाल या हरे रंग का, रसयुक्त और बेलनाकार
-
पत्तियाँ: चौड़ी, मांसल, हृदयाकार, चिकनी और चमकदार
-
फूल: छोटे, सफेद या गुलाबी रंग के
-
फल: गोलाकार, बैंगनी या काले रंग के
- बीज: छोटे, कठोर और गोलाकार
Chemical Composition
बीटा-कैरोटीन
फ्लेवोनॉइड्स
फेनोलिक यौगिक
म्यूसीलेज (चिकनाई द्रव्य)
आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम
प्रोटीन और विटामिन A, C
एंथोसाइनिन्स (लाल रंग के लिए उत्तरदायी)
Guna-Karma
Rasa- मधुर, तिक्त
Guna- गुरु, स्निग्ध
Virya- शीतल
Vipaka- मधुर
Karma- पित्तशामक,
व्रणशोधक,
रक्तपित्तहर,
दीपनीय,
बल्य (शक्ति प्रदान करने वाला),
स्तन्यजनक (दूध बढ़ाने वाला),
मूत्रल (मूत्रवर्धक)
Doshakarma- पित्त व वात दोष का शमन
Medicinal uses
पित्त विकारों में लाभकारी
रक्तपित्त एवं रक्तस्राव में उपयोगी
व्रण एवं जलन में शीतल प्रभावकारी
कब्ज़ में लाभदायक (मल को कोमल बनाता है)
ज्वर एवं पित्तज विकारों में उपयोगी
प्रसूता स्त्रियों में स्तन्यवृद्धि हेतु लाभकारी
त्वचा रोगों में लेप के रूप में उपयोगी
Useful Part
पत्तियाँ, तना, बीज
Doses
पत्तियों का रस: 10–15 मिलीलीटर
बीज चूर्ण: 2–3 ग्राम
क्वाथ: 20–30 मिलीलीटर
Important Formulation
पोटकी पत्तों का स्वरस – पित्त विकारों में
पोटकी बीज चूर्ण – मूत्रवर्धक एवं रक्तशोधक
पोटकी लेप – जलन एवं व्रण पर बाह्य उपयोग हेतु
Shloka
“उपोडिका मधुरा तिक्ता, गुरुश्च स्निग्धशीतला।
पित्तशोषक व्रणेषु च, स्तन्यवृद्धिकरी स्मृता॥”
क्तपित्तप्रशमनश्च, कुष्ठशोथविनाशनः॥"
Hindi Name
पोटकी, पोई, लाल बसल, बासेला
English Name
Indian Spinach, Red Malabar Spinach, Ceylon Spinach
Botanical Name
Basella rubra Linn.
Family
Basellaceae
