कुष्ठ (leprosy) में अत्यधिक प्रभावी
कण्डू, त्वग्दोष, उपदंश, व्रण, फोड़े-फुंसी में उपयोगी
गठिया व आमवात में तैल का बाह्य प्रयोग
त्वचा पर लेप रूप में संक्रमण निवारण हेतु
जीवाणुनाशक व शोथहर प्रभाव
कुछ मात्रा में औषधीय तैल का आंतरिक प्रयोग भी किया जाता है (विशेष निगरानी में)
Useful Part
बीज
बीज से निकाला गया तेल (Chaulmoogra oil)
Doses
तैल: 5–15 बूँद (आंतरिक उपयोग हेतु, चिकित्सकीय निगरानी में)
बाह्य उपयोग: आवश्यकता अनुसार
चूर्ण (बीज का): 500 मि.ग्रा – 1 ग्राम