यह पौधा भारत के समस्त मैदानी भागों, शुष्क एवं शैलमय भूमि में पाया जाता है। विशेषकर राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात एवं उत्तर प्रदेश में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
यकृत रोग (हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस) में लाभकारी
प्लीहावृद्धि एवं यकृतवृद्धि में
कृमिनाशक एवं शोथहर
रक्तशोधन हेतु
उदरशूल, अजीर्ण व अपच में
त्वचारोगों में