मुद्गपर्णी मूँगपर्णी त्रिकल्पिका
वार्षिक या द्विवार्षिक बेलदार पौधा
भारत के उपोष्णकटिबंधीय और शुष्क क्षेत्रों में सामान्य। इसे खेतों, झाड़ियों और मार्ग किनारे उगते हुए देखा जा सकता है।
प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट फ्लेवोनॉयड्स सैपोनिन्समिनरल्स (Ca, K, Mg) फाइबर और स्टार्च
Rasa-मधुर Guna- हल्का, स्निग्ध Virya- उष्ण Vipaka- मधुर Karma- रवातकफशामक, मूत्रविकारनिवारक, पाचन सुधारक, बल्यवर्धक Doshakarma- वात-कफ शामक, पित्त नियंत्रक
मूत्रविकार (दुर्दर्श, मूत्रकृच्छ्र) में उपयोगी कब्ज और अपच में लाभकारी वात-कफ विकार, जोड़ों और स्नायु रोग में सहायककमजोरी और बलहानि में बल्यवर्धक त्वचा रोगों में बाह्य उपयोग
पत्ते, फल, बीज
पत्ती क्वाथ- 20–50 मिलीलीटर बीज चूर्ण- 2–5 ग्राम बाह्य लेप- आवश्यकतानुसार
मुद्गपर्णी क्वाथ बृंहणीय और वातकफशामक योग मूत्रविकार निवारक मिश्रण
मुद्गपर्णी वातकफशामक बल्यदायक। मूत्रविकारशमन, पाचन सुधायक च शोथहर॥ "मुद्गपर्णीतुबलदातृष्णाशान्तिकरीस्मृता। वातपित्तहराप्रोक्तादाहशोषहरापरा॥" (भावप्रकाशनिघण्टु)
मुद्गपर्णी, मूँगपर्णी
Wild Black Gram, Three-lobed Bean
Phaseolus trilobus Roxb.
Fabaceae (Leguminosae)