HERBAL GARDEN

कीटमारी

Classification

Synoyms

कृमिघ्ना
विषघ्ना
गुंडलिका
कृमिहरिणी

Habit

बहुवर्षीय शाकीय लता (creeping herb)

Habitat

भारत में विशेषकर शुष्क व उष्ण क्षेत्रों में – राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु तथा दक्खन क्षेत्र में पाई जाती है। शुष्क झाड़ियों और खेतों की बाड़ों पर उगती है।

Morphology

  • तना (Stem)- पतला, रेंगने वाला या चढ़ने वाला।
  • पत्ते (Leaves)- छोटे, त्रिकोणाकार से अंडाकार, हरे।
  • फूल (Flowers)- हरे या बैंगनी रंग के, ट्यूबलर आकार के, विशिष्ट ब्रैक्ट से युक्त।
  • फल (Fruits)- सूखे, कैप्सूल रूप में, जिसमें छोटे-छोटे बीज होते हैं।

Chemical Composition

Aristolochic acid
अल्कलॉइड्स
फ्लेवोनॉयड्स टैनिन
ग्लाइकोसाइड्स
आवश्यक तेल

Guna-Karma

Rasa- तिक्त, कटु
Guna-लघु, तीक्ष्ण
Virya- उष्ण
Vipaka- कटु
Karma- कृमिघ्न, ज्वरनाशक, विरेचक, गर्भनिरोधक, विषघ्न, दीपनीय, पाचनकारक
Doshakarma- कफ-वात शामक, पित्त वर्धक

Medicinal uses

कृमिरोग (आंतों के कीड़े) में उपयोगी
ज्वरहर एवं पाचन सुधारक
कीट व सर्पदंश में विषनाशक
प्रमेह व आमविकारों में उपयोगी
गर्भनिरोधक एवं स्त्री रोगों में (लोकचिकित्सा में)
कब्ज व पाचन विकारों में विरेचक

Useful Part

पत्ते, बीज, संपूर्ण लता

Doses

पत्तों का रस : 5–10 मिलीलीटर
चूर्ण : 1–3 ग्राम
क्वाथ : 20–40 मिलीलीटर

Important Formulation

कीटमारी चूर्ण
कीटमारी रस / स्वरस
कीटमारी क्वाथ

Shloka

कीटमारी तिक्ता कटुका कृमिघ्नी ज्वरनाशिनी।
विषघ्नी विरेका चैव स्तन्यदोषप्रशामिनी॥

Hindi Name​

कीटमारी, गुंडेल, गुंडल

English Name

Bracteated Birthwort

Botanical Name

Aristolochia bracteata Retz.

Family

Aristolochiaceae

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