HERBAL GARDEN

सनाय

Classification

Synoyms

सनाय
सना
त्रिवर्णा
सिंधुनी
पाचनवर्धक

Habit

वार्षिक या द्विवार्षिक झाड़ी

Habitat

भारत में राजस्थान, पंजाब, गुजरात और कर्नाटक के शुष्क व उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मुख्य रूप से उगती है। यह अफ्रीका और मध्य पूर्व में भी पाया जाता है।

Morphology

  • तना (Stem): पतला, हरा, झाड़ीदार।
  • पत्ते (Leaves): विषुवर, छोटे, पैरों के समान खंडित, हरे।
  • फूल (Flowers): पीले, छोटे, गुच्छेदार।
  • फल (Pods): लंबी, पतली, हरी कैप्सूल, बीज युक्त।
  • बीज (Seeds): छोटे, कठोर, गहरे भूरे।

Chemical Composition

एंथ्राकिनोन ग्लाइकोसाइड्स (Sennosides A & B) – मुख्य सक्रिय घटक
फ्लेवोनॉयड्स
टैनिन्स
फैटी एसिड्स
स्टार्च और प्रोटीन

Guna-Karma

Rasa-मधुर, तिक्त
Guna- लघु, हल्का
Virya- उष्ण
Vipaka- मधुर
Karma-मृदु विरेचक, कृमिघ्न, मूत्रल, ज्वरहर, पाचन सुधारक
Doshakarma-वातवर्धक (अत्यधिक सेवन पर), कफ शमन, पित्त संतुलक

Medicinal uses

कब्ज (कठोर/दीर्घकालिक) में मृदु विरेचक
आंतरिक कृमि रोगों में
पाचन दोष और अपच में उपयोगी
ज्वर और रक्तदोष में सहायक
मूत्रविकार और प्लीहा विकार में लाभकारी

Useful Part

पत्ते, फल

Doses

पत्ती चूर्ण : 1–3 ग्राम
क्वाथ/रस : 20–50 मिलीलीटर
बाह्य लेप : आवश्यकतानुसार

Important Formulation

सनाय पत्ती चूर्ण
विरेचक चूर्ण एवं हर्बल लीविंग
संयुक्त पाचनवर्धक और विरेचक योगों में प्रयोग

Shloka

सनाय पत्ताः मृदुविरेचकाः कृमिघ्नाश्च।
कब्जशमन, ज्वरहर शोथहर, पाचनवर्धकाः॥

Hindi Name​

सनाय, सना, सेंधा, तिन्तिरा

English Name

Senna, Indian Senna, Alexandrian Senna

Botanical Name

Cassia angustifolia Vahl.

Family

Fabaceae (Leguminosae)

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