HERBAL GARDEN
अपराजिता
Classification
Synoyms
अश्वत्थ
प्लक्ष
बोधिवृक्ष
वटपत्र
पीपल
Habit
सदाबहार, विशालकाय, दीर्घायु वृक्ष
Habitat
भारत के लगभग सभी भागों में, विशेषकर मंदिरों, सड़कों के किनारों, खुले मैदानों और गांवों में पाया जाता है। श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी व्यापक रूप से फैला हुआ है।
Morphology
- ऊँचाई – 20–30 मीटर तक
-
तना – सीधा, चौड़ा, धूसर या हल्का भूरा, छाल थोड़ी खुरदरी
-
पत्ते – हृदयाकार, लंबी नुकीली नोक वाले, 10–17 से.मी. लंबे, चिकने
-
फूल – अदृश्य (syconium के भीतर), लघु आकार के
-
फल – गोल, छोटे, पकने पर लाल या बैंगनी
- बीज – सूक्ष्म, हल्के, अनेक
Chemical Composition
टैनिन, फाइटोस्टेरॉल, फ्लेवोनॉयड्स, फिक्स्ड ऑइल, बीटा-सिटोस्टेरॉल, ग्लूकोज, फिकसिन, एंजाइम्स, पोटैशियम, कैल्शियम, और विभिन्न अमीनो एसिड पाए जाते हैं।
छाल में कसैले टैनिन अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।
Guna-Karma
Rasa- कषाय, मधुर
Guna- गुरु, रूक्ष
Virya- शीत
Vipaka- मधुर
Karma- रक्तपित्तहर, अतिसारहर, प्रदरहर, मूत्रल, व्रणरोपण, श्वासहर, दाहशामक
Doshakarma- पित्त-कफ शामक
Medicinal uses
रक्तपित्त एवं नाक से खून बहने में
अतिसार एवं प्रवाहिका में
प्रदर एवं स्त्री रोगों में
मूत्रकृच्छ्र एवं मूत्रपथ संक्रमण में
व्रण एवं घाव भरने में
दंत रोगों में काढ़ा/कुल्ला के रूप में
श्वास एवं खाँसी में छाल का उपयोग
Useful Part
पत्ते, कोमल अंकुर, छाल, फल, दूध (latex)
Doses
छाल काढ़ा – 30–50 मि.ली.
पत्तों का रस – 10–15 मि.ली.
छाल चूर्ण – 3–6 ग्राम
Important Formulation
अश्वत्थ छाल काढ़ा
प्रदरहर योग
रक्तपित्तहर योग
Shloka
अश्वत्थस्तु कषायश्च गुरुश्च शीतलो रसः।
पित्तकृच्छ्रप्रदरघ्नो रक्तपित्तविनाशनः॥
Hindi Name
पीपल, अश्वत्थ
English Name
Sacred Fig, Peepal Tree
Botanical Name
Ficus religiosa Linn.
Family
Moraceae
