काकजंघा पित्तहर वातशामक
छोटी झाड़ी, घास जैसा फैलाव
भारत में जंगलों के किनारे, खुली और आर्द्र भूमि में पाया जाता है। उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सामान्य है।
फ्लेवोनॉइड्स टैनिन्स सैपोनिन्स एल्कलॉइड्स कार्बोहाइड्रेट और फाइबर
Rasa- कषाय, कटु Guna- हल्का, सुखद Virya- उष्ण Vipaka- कटु Karma- वातशामक, पाचनशक्ति वर्धक, मूत्रविकारहर, कृमिघ्न Doshakarma- वात और कफ शामक, पित्तशामक (मध्यम मात्रा में)
पत्ते – पेट दर्द, अपच और वात विकार में उपयोगी जड़ – मूत्रविकार और कृमिनाशक फूल – वातपित्त नियंत्रक सूखा पौधा – जलाकर धूम्रण रूप में वातशामक
पत्ते जड़ फूल
पत्ते का काढ़ा – 20–30 ml जड़ चूर्ण – 1–2 ग्राम सूखा फूल – आवश्यकता अनुसार
काकजंघा पत्ती काढ़ा (वात-पित्त शमन, अपच में) जड़ चूर्ण (मूत्रविकार और कृमिनाशक)
काकजंघापत्रं वातहरं पाचनशक्तिवर्धनम्। मूत्रविकारनाशकं कृमिनाशकं च सदा।।
काकजंघा, काकझंघा
Peristrophe, Winged Peristrophe
Peristrophe bicalyculata (Retz.) Nees
Acanthaceae