यह मुख्य रूप से समशीतोष्ण क्षेत्रों में उगाया जाता है। भारत में हिमालयी क्षेत्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, और मध्य प्रदेश में इसकी खेती की जाती है।
Morphology
यह पौधा 1 से 1.5 मीटर ऊँचा होता है।
इसकी पत्तियाँ लंबी, संकरी और चिकनी होती हैं।
पुष्पक्रम पैनिकल के रूप में होता है तथा इसके दाने छोटे, चपटे, भूरे या हल्के पीले रंग के होते हैं।
जड़ें रेशेदार होती हैं।
Chemical Composition
जई के बीजों में प्रोटीन (12–15%), कार्बोहाइड्रेट (60–70%), फाइबर, वसा (4–6%), कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, थायमिन, राइबोफ्लेविन, और विटामिन E प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें Avenin, Avenacosides, β-glucan जैसे यौगिक प्रमुख हैं।
दुर्बलता एवं कांति ह्रास में बल्य औषधि के रूप में
मानसिक तनाव और अनिद्रा में उपयोगी
हृदय स्वास्थ्य सुधारने हेतु
पाचन क्रिया को सुधारता है
मधुमेह में सहायक आहार
त्वचा को पोषण देने के लिए भी उपयोगी
Useful Part
बीज (Seeds)
Doses
चूर्ण – 10–20 ग्राम
दलिया/भोजन के रूप में – आवश्यकतानुसार