HERBAL GARDEN

स्वर्णक्षीरी

Classification

Synoyms

स्वर्णक्षीरी
कनक क्षीरिणी
रक्ताक्षीरी (द्वितीय भेद)
हीनधत्तूर
यवाक्षीरी

Habit

कांटेदार शाक (herbaceous annual plant)

Habitat

यह उष्ण एवं शुष्क जलवायु वाले स्थानों में विशेषतः पथरीली भूमि, खेतों के किनारे, रास्तों के किनारे स्वतः उगता है। भारत के सभी भागों में विशेषकर गर्म स्थानों में पाया जाता है।

Morphology

  • यह 30–100 सेमी ऊँचा काँटेदार पौधा होता है।
  • पत्तियाँ गहरे हरे रंग की, श्वेत रेखाओं वाली और कांटेदार होती हैं।
  • फूल चमकीले पीले रंग के होते हैं।
  • फल लंबवत, काँटेदार कैप्सूल के रूप में होता है जिसमें अनेक बीज होते हैं।
  • पौधे से पीला दूध (लेटेक्स) निकलता है जो विषैला होता है।

Chemical Composition

Alkaloids: Sanguinarine, Dihydrosanguinarine, Berberine, Protopine
Fixed oils
Toxic proteins
Isoquinoline derivatives

Guna-Karma

Rasa- कटु, तिक्त
Guna- लघु, तीक्ष्ण, रूक्ष
Virya- उष्ण
Vipaka- कटु
Karma- कृमिघ्न, कुष्ठघ्न, व्रणशोधक, कण्डूनाशक, दीपन, वेदनास्थापक, शोथहर, वमनकारक (in large dose)
Doshakarma- कफ-वात शामक (मात्रातिरेक से त्रिदोषों को विकृत करता है)

Medicinal uses

त्वचा विकारों में लेप या लेटेक्स का प्रयोग
अर्श, कण्डू, कुष्ठ में बाह्य उपयोग
व्रण व्रणशोधन हेतु उपयोग
स्वप्नदोष, श्वास-कास में सीमित मात्रा में प्रयोग
जलने पर लेटेक्स लगाने से राहत
नेत्र रोगों में बीज तेल का बाह्य प्रयोग (परंतु अत्यंत सावधानी से)

Useful Part

बीज
लेटेक्स
मूल
पत्र

Doses

चूर्ण: 250–500 मि.ग्रा (विवेकपूर्वक)
तेल: 1–3 बूँद (बाह्य उपयोग)
लेटेक्स: 1–2 बूँद (केवल बाह्य प्रयोग)

Important Formulation

स्वर्णक्षीरी तैल
कुष्ठघ्न लेप
कृमिघ्न क्वाथ

Shloka

स्वर्णक्षीरी तिक्ता तीव्रा कटुका रुक्षोष्णवीर्यका।
कृमिघ्नी कुष्ठनाशिन्या लेखनी चोषकात्मिका॥

Hindi Name​

पीला धतूरा, स्वर्णक्षीरी

English Name

Mexican Poppy

Botanical Name

Argemone mexicana

Family

Papaveraceae

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