HERBAL GARDEN

लीची

Classification

Synoyms

लीची फल
शीतफल
मधुरफल

Habit

मध्यम आकार का सदाबहार वृक्ष

Habitat

यह उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। भारत में बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल में अधिकता से इसकी खेती होती है।

Morphology

  • ऊँचाई: 9–12 मीटर का सदाबहार वृक्ष
  • पत्ते: संयुक्त, भालाकार, गहरे हरे और चमकदार
  • फूल: छोटे, पीले-हरे रंग के, गुच्छों में
  • फल: गोलाकार या अंडाकार, लाल-गुलाबी छिलके वाला, रसदार गूदे सहित
  • बीज: भूरा, चमकदार और चिकना

Chemical Composition

कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज़, फ्रक्टोज़)
विटामिन C
बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन (नियासिन, थायमिन, राइबोफ्लेविन)
खनिज (पोटैशियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन, मैग्नीशियम)
फ्लेवोनॉइड्स, पॉलीफेनॉलिक यौगिक
सैपोनिन्स और टैनिन (बीज में)

Guna-Karma

Rasa-मधुर, तिक्त (बीज)
Guna- लघु, स्निग्ध, शीतल
Virya- शीतल
Vipaka- मधुर
Karma- रक्तवर्धक, पाचनशक्ति वर्धक, दाहशामक, बल्य, व्रणरोपण, कृमिघ्न (बीज)
Doshakarma- पित्तशामक, कफवर्धक (अत्यधिक सेवन पर)

Medicinal uses

फल हृदय के लिए हितकारी, रक्तवर्धक और तृष्णा नाशक
बीज – अतिसार, रक्तस्राव एवं कृमि रोगों में उपयोगी
छाल का काढ़ा – गले के रोग, व्रण और रक्तपित्त में
पाचनशक्ति को बढ़ाने और कमजोरी दूर करने में सहायक
फल का गूदा सौंदर्यवर्धक (त्वचा के लिए लाभकारी)

Useful Part

फल
बीज
छाल

Doses

बीज चूर्ण – 1–2 ग्राम
छाल काढ़ा – 20–30 ml
फल – आवश्यकतानुसार (आहार रूप में)

Important Formulation

लीची बीज चूर्ण (अतिसार में)
लीची छाल काढ़ा (व्रण और रक्तपित्त में)

Shloka

लीचीफलानि शीतानि मधुराण्यथ बलप्रदम्।
रक्तवृद्धिकराण्येव तृष्णाशोषनिवारकाः।।

Hindi Name​

लीची

English Name

Litchi / Lychee

Botanical Name

Litchi chinensis (Gaertn.) Sonn.

Family

Sapindaceae

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