चव्य चित्रकपर्याय चविका कटुक अग्निवर्धिनी पिप्पलीचित्रक
बहुवर्षीय, काष्ठीय, आरोही लता
बंगाल, असम, त्रिपुरा, उत्तर-पूर्वी भारत, बांग्लादेश, म्यांमार और थाईलैंड के आर्द्र एवं उष्ण क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है।
पिपेरिन चवीनिन आवश्यक तेल (Essential oils) वसा अम्ल प्रोटीन और स्टार्च टर्पेन्स और फ्लेवोनॉइड्स
Rasa- कटु Guna- लघु, तीक्ष्ण, स्निग्ध Virya- उष्ण Vipaka- कटु Karma- दीपनीय, पाचनीय, वातकफहर, श्वासकासहर, आमपाचक, कृमिघ्न, हृदयबल्य Doshakarma- वात-कफ दोष का शमन, पित्त को बढ़ाता है
भूख न लगना, मंदाग्नि अजीर्ण, आमज विकार श्वास, कास, ज्वर उदरशूल, वातशूल कृमिरोग वात-कफजन्य सिरदर्द हृदय रोग में बल्य के रूप में
फल
चूर्ण: 1–3 ग्राम काढ़ा: 20–40 मि.ली. अवलेह में मात्रा: 3–6 ग्राम
त्रिकटु चूर्ण चव्याद लेह्य चव्याद चूर्ण दशमूलारिष्ट
चव्यां कटुकां लघ्वीं तिक्तोष्णां कफवातजित्। दीपनीं पाचनीं तिक्ता कृमिघ्नीं हिता स्मृता॥ चव्यंकटुंलघुतीक्ष्णंदीपनंपाचनंसरम्। अम्लानिलविनाशायग्रहण्यांचविशेषतः॥
चव्य, चब, चबाई
Java long pepper, Chaba pepper
Piper chaba Hunter.
Piperaceae