HERBAL GARDEN
जल मधुक (Jal Madhuk)
Classification
Synoyms
Madhuka, Gulva, Madhupushpa, Ksirapushpa, Taru madhuka
Habit
बड़ा, सदाबहार वृक्ष
Habitat
यह वृक्ष भारत के सभी उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा के वनों में स्वाभाविक रूप से उगता है।
Morphology
- ऊँचाई: लगभग 10–15 मीटर
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तना: मोटा, धूसर रंग का, खुरदरा
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पत्तियाँ: चौड़ी, अंडाकार, गहरे हरे रंग की
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फूल: छोटे, सफेद से क्रीम रंग के, मधुर गंध वाले
-
फल: मांसल, अंडाकार, पकने पर पीले रंग का
- बीज: अंडाकार, भीतर से तेलयुक्त
Chemical Composition
ग्लूकोज, सुक्रोज, फ्रुक्टोज (फूलों में)
टैनिन्स (छाल में)
सैपोनिन्स
फ्लेवोनॉइड्स
स्टेरॉल्स
वसायुक्त तेल (बीजों से)
ट्राइटरपेनॉइड्स
विटामिन C और खनिज तत्व
Guna-Karma
Rasa- मधुर, कषाय
Guna- गुरु, स्निग्ध
Virya- शीतल
Vipaka- मधुर
Karma- बल्य (शक्ति प्रदान करने वाला),
पौष्टिक,
वात-पित्त शामक,
व्रणरोपक (घाव भरने वाला),
रक्तशोधक,
कासहर (खांसी निवारक),
स्तन्यवर्धक,
दाहशामक
Doshakarma- वात-पित्त शामक
Medicinal uses
शरीर को पौष्टिकता और शक्ति प्रदान करता है
पित्त विकारों में उपयोगी
त्वचा रोगों एवं घावों में लेप रूप में उपयोगी
खांसी, ज्वर एवं दाह में लाभकारी
बीजों का तेल त्वचा पर लगाने से सूजन, फोड़े, जलन में लाभ
स्तन्यवृद्धि हेतु स्त्रियों में उपयोगी
मधुमेह एवं रक्ताल्पता में सहायक
Useful Part
फूल, बीज, छाल, पत्तियाँ
Doses
फूल चूर्ण: 5–10 ग्राम
छाल क्वाथ: 20–40 मिलीलीटर
बीज तेल: 5–10 बूँदें (बाह्य उपयोग हेतु)
Important Formulation
मधुका पुष्प क्वाथ – वात-पित्त विकारों में
मधुका तेल (महुआ तेल) – त्वचा रोग एवं व्रण में
मधुका पुष्प पेय – पौष्टिक पेय एवं शरीर शीतलता हेतु
Shloka
“मधुकं मधुरं स्निग्धं, शीतलं बलवर्धनम्।
वातपित्तहरं चैव, व्रणरोगनिवारणम्॥”
Hindi Name
महुआ, जल मधुक, मधुका वृक्ष
English Name
Indian Butter Tree, Mahua Tree
Botanical Name
Bassia latifolia Roxb.
Family
Sapotaceae
