HERBAL GARDEN

वृद्धदारू

Classification

Synoyms

वृद्धदारु
समुंद्रशोभा
मल्लिका
अरण्यजटा
बल्यवल्ली

Habit

बहुवर्षीय, चढ़ने वाली लता

Habitat

भारत के उष्णकटिबंधीय व उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जंगलों, झाड़ियों और खुले क्षेत्रों में पाई जाती है। विशेषतः पश्चिमी घाट, मध्य भारत और बंगाल क्षेत्र में पाई जाती है।

Morphology

  • यह एक मजबूत, बालदार, चढ़ने वाली लता होती है।
  • पत्तियाँ हृदयाकार, बड़ी व रोएँदार होती हैं।
  • फूल बैंगनी रंग के, घंटाकार व सुंदर होते हैं।
  • फल गोल व छोटे होते हैं, जिनमें बीज होते हैं।
  • मूल मोटी व जड़युक्त होती है, जो औषधीय रूप से अत्यंत उपयोगी है।

Chemical Composition

Alkaloids (ergoline group)
Glycosides
Resins
Starch
Fatty acids (in seeds)
Flavonoids

Guna-Karma

Rasa- मधुर, तिक्त
Guna- गुरु, स्निग्ध
Virya- उष्ण
Vipaka- मधुर
Karma- बबल्य, वृष्य, रसायन, मेध्य, शुक्लवर्धक, वातहर, ज्वरहर
Doshakarma- वात व कफ शामक

Medicinal uses

वाजीकरण और पुरुष बांझपन में
मानसिक दुर्बलता और स्मृति दोष में
वातरोग, आमवात, स्नायविक कमजोरी
बुढ़ापे से संबंधित दुर्बलता
नपुंसकता, शीघ्रपतन, शुक्रदोष
शरीर की पोषण शक्ति बढ़ाने हेतु
बालकों के लिए बृंहण एवं बल्य औषध

Useful Part

मूल (जड़)
बीज (वाजीकरण हेतु)
पत्तियाँ और पुष्प (लेप रूप में)

Doses

मूल चूर्ण: 3–6 ग्राम
बीज चूर्ण: 1–3 ग्राम
क्वाथ (मूल का): 40–60 मि.ली

Important Formulation

वृद्धदारु चूर्ण
वाजीकरण वटी
बल्य पाक
अश्वगंधादि वटी में सहगटक

Shloka

वृद्धदारु गुरु स्निग्धा बल्या वृष्या रसायनी।
वातश्लेष्महरा तिक्ता शीतला मेध्यकारिणी॥

Hindi Name​

वृद्धदारू, समुंद्रशोभा, बढ़

English Name

Elephant Creeper

Botanical Name

Argyreia speciosa Sweet

Family

Convolvulaceae (कलमी कुल)

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