दर्भा शीतगर्भायज्ञियापवित्रा
बहुवर्षीय, राइजोमयुक्त घास
भारत के अधिकांश उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में, विशेषकर खेतों, जंगलों, सड़क किनारों और आर्द्र भूमि में।
टैनिन, सैपोनिन, फ्लेवोनॉयड्स, सिलिका, शर्करा, सेल्यूलोज
Rasa- मधुर, तिक्त Guna- लघु, स्निग्ध Virya- शीत Vipaka- मधुर Karma- मूत्रल, रक्तस्तम्भक, पित्तशामक, दाहशामक, रजोनाशक Doshakarma- पित्त-शामक, वत-कफ को बढ़ाने वाला
मूत्रकृच्छ्र (डिस्यूरिया) एवं मूत्राघात में रक्तपित्त एवं नाक से खून बहने में पित्तज ज्वर एवं दाह में रजोनाश एवं अतिसार में जलन एवं शारीरिक उष्णता में
मूल (Rhizome)
मूल चूर्ण – 3–6 ग्राम काढ़ा – 40–50 मि.ली.
दर्भ कषाय मूत्रल योग
दर्भा तिक्तामधुरा लघु स्निग्धा शिता शुभा। पित्तदाहप्रशमनी मूत्रकृच्छ्रनिवारिणी॥ "दर्भामूत्रकृच्छ्रेचरक्तपित्तेतथैवच। दाहेतृष्णासुशस्यन्तेशीतलालघुताकरा॥"
दर्भ, कुशदर्भा
Cogon Grass, Blady Grass
Imperata cylindrica (L.) Raeusch.
Smilacaceae