HERBAL GARDEN
गोनासी (Gonasi)
Classification
Synoyms
नागमूली, विषमूली, सर्पपुष्पी, कुष्ठघ्नी
Habit
एक बारहमासी (perennial) शाकीय पौधा, जो भूमिगत कंद (tuber) से उत्पन्न होता है।
Habitat
यह पौधा हिमालयी क्षेत्रों में 1200–3000 मीटर की ऊँचाई पर पाया जाता है, विशेषकर उत्तराखंड, सिक्किम, भूटान, नेपाल और दार्जिलिंग में नम एवं छायादार स्थलों पर उगता है।
Morphology
- यह पौधा 30–60 सेमी ऊँचा होता है।
- इसके पत्ते दो या तीन खंडों में विभाजित होते हैं और लंबे डंठल पर स्थित रहते हैं।
- पुष्पक्रम (inflorescence) एक लंबा, बैंगनी रंग का स्पाथ (spathe) होता है, जिसके अंदर एक पतला स्पैडिक्स (spadix) होता है जो सर्प के फन जैसा दिखाई देता है।
- इसका फल लाल रंग का बेरी के रूप में होता है।
- भूमिगत भाग गोल, मांसल कंद के रूप में होता है जो औषधि में उपयोगी होता है।
Chemical Composition
इस पौधे के कंद में starch, calcium oxalate crystals, flavonoids, saponins, alkaloids, और glycosides पाए जाते हैं। इनमें उपस्थित calcium oxalate इसे स्वाभाविक रूप से विषाक्त बनाता है, इसलिए शोधन प्रक्रिया के बाद ही इसका उपयोग किया जाता है।
Guna-Karma
Rasa- मकषाय, तिक्त, कटु
Guna- तीक्ष्ण, लघु, उष्ण
Virya- उष्ण
Vipaka- कटु
Karma- कफवातहर, दीपक, पाचक, कृमिघ्न, शूलहर
Doshakarma- वात-कफ शामक, पित्तवर्धक
Medicinal uses
कफज विकारों, जैसे- खाँसी, अस्थमा, और कफज श्वास में उपयोगी।
वातविकार एवं संधिवात में दर्द निवारक।
त्वचा विकारों एवं सूजन में उपयोगी (बाह्य रूप से)।
कृमिनाशक एवं पाचन को सुधारने वाला।
शुद्ध रूप में इसका उपयोग वात-कफ दोषों के शमन हेतु किया जाता है।
अत्यधिक मात्रा में सेवन विषाक्त हो सकता है, इसलिए चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है।
Useful Part
कंद (Tuber / Rhizome)
Doses
शुद्धिकृत कंद चूर्ण: 250–500 mg प्रति दिन
बाह्य प्रयोग: पेस्ट के रूप में
Important Formulation
नागमूली चूर्ण
विषघ्न लेप योग
वातकफ शामक तेलों में घटक के रूप में
Shloka
"तीक्ष्णोष्णं कटुकं तिक्तं विषघ्नं कफवातजित्।
श्लेष्मशोथहरं मूत्रं दीपकं नागमूली स्मृता॥"
Hindi Name
गोनासी / नागमूसा
English Name
Cobra Lily / Himalayan Arisaema
Botanical Name
Family
Araceae
