HERBAL GARDEN
कीटमारी (Keetmari)
Classification
Synoyms
धूम्रपात्र, किटमारी, नकुली
Habit
एक छोटी हरी बारहमासी (or द्विवार्षिक) जड़ी-बूटी की तरह की लता/भूमि पर फैलने वाली पौधा।
Habitat
भारत के कई भागों में पाया जाता है, विशेषकर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दक्षिण भारत और श्रीलंका में। त्रैण (temperate) तथा उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भूमि-तल या हल्की लता-आधारित वृद्धि दिखाता है।
Morphology
- उचाई लगभग 1–2 फीट के आसपास।
-
डंठल (stem) नारीयल रूप से टहनीदार हो सकता है, शाखायुक्त तथा कहीं-कहीं लता-प्रवृत्ति।
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पत्ते 2-3 इंच लम्बे, गुर्दे के आकार (kidney-shaped) या झड़ू जैसे होते हैं, पतले, झिल्लीकृत।
- फूल एकल, बैंगनी-रंग के, स्पाथ (spathe) जैसे संरचना में; फल वृत्ताकार या अंडाकार, एक-इंच तक।
Chemical Composition
इसमें aristolochic acid मुख्य रूप से पाया गया है।
साथ ही फल एवं पत्तियों में ceryl alcohol, β-sitosterol, ग्लुकोसाइड्स, फेरनोलिक यौगिक, आदि पाए गए हैं।
चूंकि aristolochic acid विश्लेषण में पाया गया है, इसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए।
Guna-Karma
Rasa- कर्त, कटु
Guna- लघु, रूक्ष, तीक्ष्ण
Virya- उष्ण
Vipaka- कटु
Karma- कृमिघ्न, कुष्ठघ्न, शोथहर, विषघ्न
Doshakarma- शमन (कफवात शामक)
Medicinal uses
अंतः कृमि (intestinal worms) के उपचार में प्रमुख।
त्वचा रोग (कुष्ठ, एक्जिमा, फंगस आदि) एवं शोथ (सूस, सूजन) में बाह्य एवं आंतरिक रूप से प्रयोग।
विषप्रकरण (विषप्रभाव) के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग।
अमय (undigested toxins) पाचन को सुधारने तथा रक्तशुद्धि में सहायक।
Useful Part
पत्ते और जड़/मूल (leaves & root)
Doses
चूर्ण (Powder): लगभग 1-3 ग्राम प्रतिदिन।
decoction (काढ़ा): 50-100 मि.ली के आस-पास।
Important Formulation
Dravanthyadi Taila में घटक के रूप में।
कृमिमु्द्गर रस, क्रिमिकुथार रस आदि में सह-घटक के रूप में उल्लेखित है।
Shloka
“कटुपर्णी हैमवती हेमक्षीरी हिमावती ।
हेमाह्वा पीतदुग्धा च तन्मूलं चोकमुच्यते ॥
Hindi Name
कीटमारी, कितमारी, कीटनाशक पाकरू, कीटनाशक मूली
English Name
Bracteated Birthwort, Worm-killer Plant
Botanical Name
Aristolochia bracteolata (Lam.)
Family
Aristolochiaceae (इश्वरी कुल)
