पारसिक यवानी कृष्ण यवानी जंगी यवानी यवानी काली
वार्षिक, द्विवार्षिक या बहुवर्षीय झाड़ीदार पौधा
भारत में शुष्क और समशीतोष्ण क्षेत्रों में, रास्तों और बंजर जमीन पर उगता है। यूरोप और मध्य पूर्व में भी पाया जाता है।
हायोस्साइन, हायोसाइन-एन-ऑक्साइड स्कोपोलामाइन एंटीऑक्सीडेंट्स फ्लेवोनॉयड्स टैनिन्स
Rasa- कटु, तिक्त Guna- रुक्ष, हल्का Virya- उष्ण Vipaka- कटु Karma- वातकफशामक, स्नायुशामक, ज्वरहर, मूत्रविकारनिवारक Doshakarma- वात-कफ शामक, पित्त नियंत्रक
स्नायु दर्द, गठिया और वात रोग में उपयोगी मूत्रविकार (दुर्दर्श, मूत्रकृच्छ्र) में लाभकारी मानसिक रोगों में तंत्रिका शांति हेतु ज्वर और सूजन में सहायक बाह्य रूप से लेप के रूप में दर्द निवारक
पत्ते, बीज, पूरे पौधे का अर्क
पत्ती क्वाथ : 10–30 मिलीलीटर (सावधानीपूर्वक) चूर्ण : 1–2 ग्राम अर्क : 5–15 मिलीलीटर
पारसिक यवानी का क्वाथ वातकफशामक मिश्रण स्नायुशामक और मूत्रविकार निवारक योग
पारसिक यवानी कटु उष्ण वातकफशामक। स्नायुशमन ज्वरहर मूत्रल शोथनाशकः॥ "वातकफहरंतीक्ष्णंमादकंवेदनापहम्। परासिकयवानीत्वंमनोव्याधिहरीसदा॥" (संदर्भ - निघण्टुसंग्रह, आयुर्वेदपरंपरा)
पारसिक यवानी, कृष्ण यवानी, जंगी यवानी
Black Henbane
Hyoscyamus niger L.
Solanaceae