HERBAL GARDEN
राजिका (Rājikā)
Classification
Synoyms
Rājikā, Asurī, Siddhārthaka, Rajani
Habit
वार्षिक शाक (Annual herb)
Habitat
यह भारत में सर्वत्र खेती के रूप में पाया जाता है, विशेषतः उत्तर भारत, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में। यह शीत ऋतु की फसल है।
Morphology
- राजिका एक शाकीय पौधा है जो लगभग 1–1.5 मीटर तक ऊँचा होता है।
- तना हरा और शाखित होता है।
- पत्तियाँ गहरे हरे रंग की, खंडित या दन्तुर किनारों वाली होती हैं।
- फूल छोटे, पीले रंग के और गुच्छों में लगते हैं।
- फलियाँ लम्बी होती हैं जिनमें छोटे, गोल, काले या गहरे भूरे बीज होते हैं।
Chemical Composition
बीजों में वाष्पशील तेल (volatile oil), सिनिग्रिन (sinigrin), म्यरोसिन (myrosin), ग्लूकोसाइनोलेट्स, एरूसिक अम्ल, एलिल आइसोथायोसायनेट, प्रोटीन, वसा, कैल्शियम, फॉस्फोरस और सल्फर यौगिक पाए जाते हैं।
Guna-Karma
Rasa- कटु
Guna- तिक्ष्ण, लघु, स्निग्ध
Virya- उष्ण
Vipaka- कटु
Karma- दीपन, पाचन, वातकफहर, कृमिघ्न, शूलहर, वेदनास्थापन, स्वेदनजनक, व्रणरोपक।
Doshakarma- वात और कफ दोष का शमन करती है, परंतु पित्त को बढ़ा सकती है।
Medicinal uses
पाचन विकारों और भूख न लगने में उपयोगी।
वात एवं कफ जन्य शूल, जोड़ों के दर्द, और सूजन में लाभकारी (तेल के रूप में)।
नास्य के रूप में जकड़न और सर्दी में लाभकारी।
त्वचा के कुष्ठ, फोड़े-फुंसी में बीज का लेप उपयोगी।
मांसपेशीय जकड़न, गठिया, और वातरोग में बाह्य अनुप्रयोग।
कृमिनाशक और शरीर को उष्णता देने वाला।
Useful Part
बीज (Seeds), तेल (Oil)
Doses
चूर्ण: 1–2 ग्राम (जल या शहद के साथ)
तेल (बाह्य प्रयोग): आवश्यकतानुसार मालिश या लेप रूप में
नास्य: 1–2 बूँद (तेल रूप में)
Important Formulation
Rājikā Churna
Siddhārthaka Taila
Rasnādi Taila
Narayan Taila
Shloka
राजिका कटु तिक्तोष्णा तिक्ष्णा दीपनी पाचनी।
वातकफहराश्चैव कृमिघ्नी शूलनाशिनी॥
Hindi Name
राई, काली सरसों, सरसों
English Name
Black mustard
Botanical Name
Brassica nigra (Linn.) Koch.
Family
Brassicaceae (Cruciferae)
