HERBAL GARDEN

अफसंतीन (Afsanteen)

Classification

Synoyms

गंधपत्री, तिक्तपत्री, कृमिघ्नी, अफसंतीना

Habit

एक बारहमासी (perennial), झाड़ीदार, सुगंधित शाकीय पौधा।

Habitat

यह पौधा यूरोप, एशिया और भारत के पर्वतीय व शीतोष्ण क्षेत्रों में पाया जाता है। भारत में यह कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, तथा उत्तराखंड के ऊँचाई वाले भागों में प्राकृतिक रूप से उगता है।

Morphology

  • अफसंतीन 30–100 सेमी ऊँचा, झाड़ीदार पौधा है।
  • इसका तना धूसर-हरा और रोएँदार होता है।
  • पत्तियाँ खंडित, गंधयुक्त और चाँदी जैसी चमकदार होती हैं।
  • पुष्प छोटे, पीले रंग के, गुच्छों में लगे होते हैं।
  • फल सूखा और छोटा होता है।
  • पौधे से सुगंधित कड़वा स्वाद वाला तेल प्राप्त होता है।

Chemical Composition

Volatile oils (जैसे α-thujone, β-thujone, camphor, cineole)
Flavonoids (quercetin, rutin)
Sesquiterpene lactones
Tannins
Absinthin (bitter principle)
Resins

Guna-Karma

Rasa- तिक्त, कषाय
Guna- लघु, रूक्ष, तीक्ष्ण
Virya- उष्ण
Vipaka- कटु
Karma- दीपक, पाचक, कृमिघ्न, वात-कफहर, ज्वरहर, शोथहर, यकृतवर्धक
Doshakarma- वात-कफ शामक

Medicinal uses

कृमि संक्रमण (intestinal worms) में उपयोगी।
मंदाग्नि, भूख न लगना, और अपच में लाभदायक।
ज्वर, विशेषकर intermittent fever में।
यकृत की दुर्बलता और पित्त विकारों में।
वात-कफ विकारों में राहत देने वाला।
बाह्य रूप में इसका तेल कीट-नाशक (insect repellent) के रूप में।

Useful Part

पत्तियाँ और पुष्प शिराएँ (Leaves and Flower tops)

Doses

चूर्ण: 1–3 ग्राम प्रति दिन
काढ़ा: 20–30 मिलीलीटर प्रति दिन
अफसंतीन तेल (बाह्य प्रयोग): आवश्यकतानुसार

Important Formulation

अफसंतीन चूर्ण
नागदौन तेल
कृमिघ्न काढ़ा
यकृतवर्धक सिरपों में घटक के रूप में

Shloka

"तिक्तं कटु कषायं च लघु रूक्षं हि शोथहरम्।
कृमिघ्नं वातकफघ्नं गंधपत्र्यं प्रकीर्तितम्॥"

Hindi Name​

अफसंतीन / नागदौन

English Name

Wormwood

Botanical Name

Artemisia absinthium Linn.

Family

Asteraceae (Compositae)

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