HERBAL GARDEN

रक्त व्याघ्रएरंड

Classification

Synoyms

व्याघ्रएरंड
रक्तेरंड
कृतकुम्भ
ताम्रपत्र
रक्तबीज

Habit

झाड़ीदार, बहुवर्षायु पौधा

Habitat

यह पौधा उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। भारत में शुष्क एवं अर्ध-शुष्क प्रदेशों की परती भूमि, सड़कों के किनारे तथा खुले स्थानों पर उगता है।

Morphology

  • ऊँचाई: 1–3 मीटर ऊँची झाड़ी
  • तना: लाल-भूरा, दूधनुमा रसयुक्त
  • पत्ते: 3–5 खंडित, लालिमा युक्त, खुरदरे
  • फूल: लाल या बैंगनी रंग के, गुच्छेदार
  • फल: त्रिखंडी कैप्सूल
  • बीज: अंडाकार, गहरे भूरे रंग के, तेलयुक्त

Chemical Composition

जेट्रोफिन (Jatrophine)
कर्केजोल (Curcain)
जेट्रोफोन (Jatrophone)
टैनिन, फ्लेवोनॉयड्स
फैटी ऑयल (बीजों से)
डाइटरपेनॉइड्स, एल्कलॉइड्स

Guna-Karma

Rasa-कटु, तिक्त, कषाय
Guna-लघु, तीक्ष्ण, उष्ण
Virya- उष्ण
Vipaka- कटु
Karma- दीपनीय, कषाय, शोथहर, कृमिघ्न, व्रणशोधक, रेचक
Doshakarma- कफ-वात शामक, पित्तवर्धक

Medicinal uses

कृमिनाशक (Anthelmintic)
रेचक (Purgative)
त्वचा रोगों में (Skin diseases)
व्रण शोधन एवं रोपण (Wound healing)
शोथ, व्रण, वायुविकारों में लाभकारी
जोड़ों के दर्द, गठिया, वायुविकार में बाह्य प्रयोग
बीज तेल रेचक एवं वातव्याधि में उपयोगी

Useful Part

पत्ते
बीज
दूधनुमा रस (Latex)

Doses

बीज चूर्ण – 250–500 mg
बीज तेल – 2–5 बूँद (सावधानीपूर्वक)
पत्तों का रस – 5–10 ml

Important Formulation

व्याघ्रएरंड तेल
कृमिघ्न योगों में उपयोग
व्रणोपचार हेतु लेप

Shloka

व्याघ्रएरंडः कटुतिक्तकषायोष्णोऽनिलकफापहः।
कृमिघ्नः शोथहृद्व्रणेषु उपयोग्यः विशेषतः।।

Hindi Name​

रक्त एरंड, लाल एरंड

English Name

Bellyache bush, Physic nut

Botanical Name

Jatropha gossypifolia Linn.

Family

Euphorbiaceae

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