मधुकमधूकमाधवमधुपुष्पसुरपुष्प
बृहत् आकार का, पर्णपाती वृक्ष
यह भारत के मध्य, पूर्वी, और दक्षिणी भागों में विशेषतः जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में पाया जाता है। गर्म एवं शुष्क जलवायु इसके लिए उपयुक्त है।
Saponins Flavonoids Madhuca oil (fatty acids: oleic, stearic, palmitic) Tannins Carbohydrates Steroids Vitamin C Mucilage
Rasa- मधुर, तिक्त Guna- गुरु, स्निग्ध Virya- शीत Vipaka- मधुर Karma- व्रणरोपक (Wound healing), त्वच्य (Skin healing), स्तन्यजनन (Galactagogue), ज्वरहर, शोथहर, दाहप्रशमन Doshakarma- वात-पित्त शामक, कफवर्धक (फल से)
त्वचा रोगों में बीज तैल उपयोगी घाव, फोड़े-फुंसी पर लेप स्तन्यवृद्धि में पुष्यजनक अर्श (पाइल्स) में छाल व फूल का प्रयोग जलन, दाह एवं ज्वर में फूल व तैल उपयोग श्वसन विकारों में छाल का क्वाथ स्त्री रोगों में फूलों का उपयोग
बीज एवं तैल फूल छाल पत्तियाँ
चूर्ण: 3–5 ग्राम क्वाथ (छाल): 30–50 ml तैल (बाह्य उपयोग): आवश्यकतानुसार पुष्प पाक: 5–10 ग्राम
मधूकादि तैल पुष्प पाक मधूक घृत स्तन्यवर्धक योग
मधुको मधुरस्तिक्तः स्निग्धो दाहज्वरापहः | व्रणघ्नः कृमिशोषघ्नः स्तन्यः स्तन्यविवर्धनः ||
महुआ, मधुक
Indian Butter Tree, Mahua Tree
Madhuca indica
Sapotaceae