यह पौधा भारत के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में, विशेष रूप से जंगलों और आर्द्र जलवायु वाले स्थानों में पाया जाता है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और उत्तर-पूर्वी भारत में अधिक पाया जाता है।
Morphology
यह 1–3 फीट ऊँचा शाकीय पौधा होता है।
पत्तियाँ लम्बी, भालाकार व सपाट होती हैं।
पुष्प श्वेताभ या हल्के बैंगनी रंग के होते हैं।
कन्द मृदु, सुगंधित और सफेद स्टार्च से भरपूर होता है।
Rasa- मधुर
Guna- गुरु, स्निग्ध
Virya- शीत
Vipaka- मधुर
Karma- बृंहण, तृप्तिकर, रसायन, बालपोषक, ज्वरहर, पित्तशामक, अतिसारहर
Doshakarma- वात-पित्त शामक
Medicinal uses
अतिसार (diarrhea), ग्रहणी, अरुचि में उपयोगी
बुखार में पौष्टिक आहार के रूप में
बच्चों के लिए पोषण व व्रद्धि हेतु
जलन, उष्णता, थकावट में शीतलता देने वाला
आंतों की सूजन में लाभकारी
व्रण व श्वास रोगों में सहायक
Useful Part
कन्द से प्राप्त तुगाक्षीरी (starch)
Doses
चूर्ण (तुगाक्षीरी): 5–10 ग्राम
बालकों हेतु: 1–3 ग्राम दूध या जल में मिलाकर
Important Formulation
तुगाक्षीरी पाक
बालबल्य पेय
अन्नग्रहणी चूर्ण तुगाक्षीरी सिद्ध दूध